भोपाल, पुलिस का रवैया हो रहा है टॉर्चर : रेप विक्टिम

भोपाल में हुए 19 साल की स्टूडेंट के साथ गैंगरेप को 4 दिन से ज्यादा हो चुके है और विक्टिम अब भी अपने घरवालों के साथ पुलिस स्टेशन के चक्कर लगा रही है | विक्टिम को इन्साफ की उम्मीद है, मगर पुलिस सिस्टम पर नाराज़गी भी है | रेप का चौथा आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। विक्टिम ने कहा “चार दिन हो गए, मैं पेरेंट्स के साथ भटक रही हूं। कभी बयान के लिए थाने तो कभी जांच के लिए हॉस्पिटल। पहले दिन एफआईआर दर्ज कराने के लिए भटकते रहे, दूसरे दिन पुलिस ने बयान दर्ज कराने के लिए दिनभर थाने में बिठाकर रखा था।”
विक्टिम अपने माता-पिता के साथ इन्साफ का दरवाजा खटखटा रही है, मगर सिस्टम का रवैया टॉर्चर जैसा है |
विक्टिम ने कहा, “मुझे तीसरे दिन मेडिकल और चौथे दिन सोनोग्राफी के लिए बुलाया गया। वही सवाल और वही जगह मेरे सामने बार-बार आ रही हैं। ‘क्या हुआ था? कहां हुआ था? कितने लोग थे? कैसे दिखते थे? क्या बोल रहे थे?’ सवाल इतने कि जवाब देते-देते गले से आवाज निकलना बंद हो जाती, लेकिन उनके सवाल खत्म नहीं होते। सिस्टम और पुलिस के खिलाफ अफसोस नहीं, बल्कि गुस्सा है।” जीआरपी एसपी अनिता मालवीय महिला होते हुए भी मेरी कहानी सुनकर मजे लेती रहीं।वह मेरी कहानी सुनकर हंसती हैं, तो इंसाफ की उम्मीद कहां रह जाती है। पोस्ट पर तो छोड़ो वे पुलिस की वर्दी पहनने लायक तक नहीं हैं।


















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माल्यार्थ फाउंडेशन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में अंतरराष्ट्रीय वेबिनार आयोजित