कविता Jwala
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आप तो इस शहर से वाकिफ़ हैं(ग़ज़ल)
आप तो इस शहर से वाकिफ़ हैं,आपने ये हलफ उठाया होता सूरज जो सोया है यहाँ वर्षों से,उसको भी कभी जगाया होता आप बाँटते ... -
हर मिसरे में घुल जाता है लावण्य तुम्हारा
कविता ने तुम्हारा कितना ख़्याल रक्खा है कि हर एक शब्द को सँभाल रक्खा है स्वर उठे तो नाज़ बने,व्यंजन उठे तो नखरे हर ... -
मैं किसी चाँद का आसमाँ हो गया
मुझे संभालो कि मुझे गुमाँ हो गया मैं किसी चाँद का आसमाँ हो गया कितना सच्चा है प्यार मेरा देखिए मैं किसी बच्चे की ... -
अगर भूख कौम के रास्ते आती है
अगर भूख कौम के रास्ते आती है तो रोटी का भी कोई धर्म बता दो, आप धनाढ्य हैं,आप बच जाएँगे खेतिहरों का भी कोई ...












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माल्यार्थ फाउंडेशन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में अंतरराष्ट्रीय वेबिनार आयोजित