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Home›जम्मू कश्मीर Jwala›घातक है पाकपरस्त मानसिकता

घातक है पाकपरस्त मानसिकता

By vivekjwala
June 26, 2017
2054
2
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विवेक ज्वाला ब्यूरो। वर्तमान में भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम के चलते निश्चित ही पाकिस्तान के मंसूबे ध्वस्त हो रहे होंगे। इसमें सबसे बड़ी बात यह है भारत की जनता भी यह समझने लगी है कि अब राष्ट्रद्रोही भाषा बोलने वालों के दिन लद चुके हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे बयानों पर जिस प्रकार की प्रतिक्रिया देखने को मिलती है, उससे तो ऐसा ही लगता है कि देश में एक बार फिर से राष्ट्रवाद का ज्वार उठ रहा है और भारत विरोधी मानसिकता दम तोड़ती हुई नजर आने लगी है। पाकिस्तान की ओर से पोषित किए जा रहे आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी बुरहान बानी और अब सब्जार अहमद की मौत के बाद पाकिस्तान को गहरा आघात लगा ही होगा।

भारतीय सेना की ओर से की गई इस जवाबी कार्यवाही के बाद उत्पन्न हुए हालातों के चलते पाकिस्तान सुधरेगा, इस बात की कल्पना करना निरर्थक ही कहा जाएगा। क्योंकि जिस प्रकार बुरहान के मारे जाने के बाद पाकिस्तान के आतंकी आकाओं ने घाटी में सक्रियता दिखाई थी, वैसी ही संभावनाओं की तलाश करता हुआ पाकिस्तान अपने आपको प्रस्तुत करेगा। इसलिए भारत सरकार को अब कश्मीर मामले में अत्यंत सचेत रहने की आवश्यकता है।  पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के चलते कश्मीर में जिस प्रकार के हालात बने हुए हैं, उनसे यही कहा जा सकता है कि पाकिस्तान इस मुद्दे को हमेशा उलझाए रखने की कवायद करता रहा है। इतना ही नहीं उसका यह खेल अब सारी दुनिया के सामने उजागर हो चुका है। अमेरिका जैसा शक्तिशाली देश यह तो मानने लगा है कि पाकिस्तान के कारण ही कश्मीर के हालात बिगड़ रहे हैं, लेकिन कश्मीर को लेकर अमेरिका को पाकिस्तान पर जैसी कार्यवाही करना चाहिए, वैसी वह नहीं कर पा रहा है। इसके पीछे उसके अपने हित हो सकते हैं, लेकिन अमेरिका का इस प्रकार का दोहरा रवैया कहीं न कहीं पाकिस्तान को समर्थन करता हुआ दिखाई देता है।

अमेरिका का यह अघोषित समर्थन अप्रत्यक्ष रूप से भारत के विरोध में उठाया गया कदम माना जा सकता है। ऐसी बात नहीं है कि आतंकवाद से अमेरिका पीड़ित नहीं है। वहां भी दिल दहलाने वाली घटनाओं को आतंकियों ने अंजाम दिया है। इतना ही नहीं अमेरिका ने आतंक के विरोध में जोरदार अभियान भी चलाया था, लेकिन पाकिस्तान के प्रति उसके अभियान में नरमी क्यों आ जाती है हालांकि अमेरिका द्वारा बरती जा रही यह नरमी कहीं न कहीं पाकिस्तान को बहुत बड़े नुकसान की ओर ले जाने का प्रयास सि( हो रहा है। कश्मीर घाटी में आतंकी षड्यंत्र रचने वाले पाकिस्तानी सपोलों को भारतीय सेना द्वारा धराशायी किए जाने से पाकिस्तान बौखला गया है। आतंकवादी ताकतें लगातार भारत के विरोध में अलगाववादी बनाकर कश्मीर घाटी में पाले गए अपने दलालों के माध्यम से  माहौल खराब करने का प्रयास करती हैं। पाकिस्तान जहां एक ओर आतंकियों की घुसपैठ कराकर कश्मीर को कब्जाने का प्रयास कर रहा है, वहीं स्थानीय युवाओं को लालच और भयभीत कर भारतीय सेना के खिलाफ बंदूक और पत्थर उठाने के लिए भी जोर लगा रहा है। आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी बुरहान बानी और सब्जार अहमद की मौत से निश्चित ही पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। कारण पाकिस्तान ने इन दोनों को ही कश्मीर घाटी में युवाओं को बरगलाने का ठेका दे रखा था। बदले में पैसा, हथियार और ऐशो आराम का सामान इन आतंकियों को भेजा जाता रहा है।

पाकिस्तान घाटी के उन युवाओं, नौजवानों को भारतीय सेना के विरु( खड़ा करना चाहता है, जो कल के कश्मीर का उज्ज्वल भविष्य गढ़ सकते हैं। सरकार जिन युवाओं के हाथ में पेन थमाकर उन्हें शिक्षित करना चाहती है, पाकिस्तान उन्हें बचपन से ही बंदूक थमाकर आतंकी बनाना चाहता है। कश्मीर के बारे में एक कहावत अत्यधिक प्रचारित है कि वह खाता भारत का है और बजाता पाकिस्तान का है। भारत की वर्तमान केन्द्र सरकार युवाओं को बंदूक पकड़ने की राह से अलग कर उनका उज्ज्वल भविष्य बनाने की दिशा में प्रयत्नशील है, लेकिन पाकिस्तान युवाओं को ऐसी राह पर ले जाने का भरसक प्रयास कर रहा है, जो उनकी प्रगति और विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। वास्तव में वर्तमान हालात ऐसे हैं जो यह सोचने के लिए मजबूर कर रहे हैं कि भारत सरकार जो आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है, वह किसके हाथ में जा रही है।

वह आम कश्मीरी युवाओं के हिस्से में जा रहा है अथवा आतंकियों के पास।विगत ढाई-तीन दशक में कश्मीरी पंडितों को विस्थापित कर और पाकिस्तानी नागरिकों और आतंकियों को स्थापित कर पाकिस्तान ने निश्चित ही कश्मीर घाटी में भारतीय समर्थन को भौतिक और मानसिक रूप में असंतुलित करने का प्रयास किया है। मोदी सरकार ने पाकिस्तानी आतंकियों के रास्ते बंद किए और घाटी में छुपे बैठे आतंकियों को खोजना शुरू किया तो पाकिस्तान और चीन की पैरवी करने वाले कुछ भारतीय राजनेताओं के पेट में मरोड़ होने लगी। कश्मीर घाटी में सेना पर पत्थर और गोलियां बरसाने वाले आतंकियों की मौत पर विलाप करते पाकिस्तानियों का छाती पीटना तो उन्हें दिखाई दिया, हिन्दुस्तानी सीमाओं की रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर  करने वाले भारतीय वीर सपूतों के सिर कटे धड़, पति और पिता के विछोह में विलाप करती वीरांगनाओं व मासूमों के आंसू और बेटे के शव पर बिलखती मां की वेदना इन्हें सुनाई नहीं दी। राष्ट्र की रक्षा के लिए तैनात जवानों के हितों पर देश की जनता कतई राजनीति नहीं चाहती। घाटी में सेना पर पत्थर बरसाने वाले पाकिस्तानी प्रतिनिधियों के प्रति आम हिन्दुस्तानी नागरिक संवेदनाएं नहीं रखता। वह चाहता है कि आतंकवादियों की ढाल बनकर सेना पर पत्थर बरसाने वाले आतंकियों पर सीधे गोलियां दागी जाएं। फिर कौन वह तथाकथित नेता हैं जो वोटों के लिए घाटी के पत्थरबाजों और बुरहान बानी जैसे आतंकियों का समर्थन करना चाहते हैं?ऐसे नेता क्या दुश्मन देश का हौसला नहीं बढ़ा रहे?कहीं ऐसा तो नहीं कि इन नेताओं को आतंकियों का समर्थन करने के लिए साधन मिलते हों?यह सब जांच का विषय हो सकता है, लेकिन यह बात अत्यंत चिंतनीय है कि भारतीय सेना की कार्यवाही की आलोचना होना देश के लिए विनाशकारी है।

इस बात के लिए राजनेताओं का सिरे से चिन्तन करने की आवश्यकता है कि कहीं हम अपने राजनीतिक स्वार्थों के चलते देश को गर्त में तो नहीं ले जा रहे?वास्तव में देश की सुरक्षा के लिए कार्यवाही की और भारतीय सेना की प्रशंसा करना चाहिए जैसा अन्य देशों में होता है।हमारे देश में नेताओं द्वारा बोली जाने वाली भाषा के आधार पर कई बार उनके आतंकियों से तार जुड़े होने की आशंका भी की गई है। राजनेताओं को सबसे पहले यह सोचना होगा कि वह सबसे पहले भारत के नागरिक हैं। अगर भारत नहीं रहेगा तो उनका भी अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। आम आदमी पार्टी के बगावती नेता कपिल मिश्रा केजरीवाल पर आतंकी का खुला समर्थन करने का खुलासा कर चुके हैं। कांग्रेस का राष्ट्र विरोधी चेहरा किसी से छुपा नहीं, कांगे्रस के नेताओं ने तो सेना की कार्यवाही की कई बार निन्दा की है और आतंकियों का समर्थन करने वाले बयान दिए हैं। समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव, उनके बेटे अखिलेश, मायावती, लालू यादव जैसे राजनेताओं का वोटों के लिए राष्ट्रहित को दांव पर लगा दिया जाना किसी से छुपा नहीं है। ऐसे में सरकार को सावधानी और सख्ती से निर्णय लेने होंगे और भारत में गृहयु( की जमीन तैयार करने का प्रयास करते पाकिस्तान की रणनीति को विफल करना होगा।

Tagsकश्मीरपाकपरस्त मानसिकता
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