जबान संभाल के | Mind your language | Ashok Wankhade Dhobi Ghat
किसी संसद द्वारा प्रधानमंत्री को भस्मासुर कहा जाए और प्रधानमंत्री द्वारा किसी सांसद को शूर्पनखा कहा जाए तो पार्लियामेंट में भाषा का स्तर कितने नीचे लेवल पर गया दिखाई देता है क्यों हमारे नेता भाषा का ध्यान नहीं रखते ? क्यों सदन में सद्भावना का अभाव दिखता है ? क्यों विपक्ष भी प्रधानमंत्री की गरिमा का ख्याल क्यों नहीं रखते ? इन तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए देखिए खबर के पीछे की खबर धोबी घाट पर अशोक वानखेड़े के साथ.


















मैं किसी चाँद का आसमाँ हो गया
आप तो इस शहर से वाकिफ़ हैं(ग़ज़ल)
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माल्यार्थ फाउंडेशन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में अंतरराष्ट्रीय वेबिनार आयोजित